दूध

जर्सी गाय के दूध से कैंसर, डायबिटीज और दमा का खतरा

कृप्या बिना पूरी post पढ़ें ऐसी कोई प्रतिक्रिया ना दें! कि अरे तुमने गाय मे भी स्वदेशी -विदेशी कर दिया ! अरे गाय तो माँ होती है तुमने माँ को भी अच्छी बुरी कर दिया !! लेकिन मित्रो सच यही है की ये जर्सी गाय नहीं ये पूतना है ! पूतना की कहानी तो आपने सुनी होगी भगवान कृष्ण को दूध पिलाकर मारने आई थी वही है ये जर्सी गाय !! सबसे पहले आप ये जान लीजिये की स्वदेशी गाय और विदेशी जर्सी गाय (सूअर ) की पहचान क्या है ? देशी और विदेशी गाय को पहचाने की जो बड़ी निशानी है वो ये की देशी गाय की पीठ पर मोटा सा हम्प होता है जबकि जर्सी गाय की पीठ समतल होती है ! आपको जानकर हैरानी होगी दुनिया मे भारत को छोड़ जर्सी गाय का दूध को नहीं पीता !

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क्या आप जानते है, आपका दूध ही आपको दे रहा है डायबिटीज ?

न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने १९९३ ई. में डायबिटीज, ऑटो इम्यून रोग, कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी कई बीमारियों की जड़ यूरोपियन गायों का दूध होने का दावा (हाइपोथिसिस)पेश किया है! इस दूध को वे A1 दूध कहते हैं! यूरोपियन गोवंशमें से होल्सटीन, फ्रिजियन, जर्सी, स्विसब्राउन के दूध में BCM7 जहर होने का मुद्दा उठने के बाद उन्होंने ऐसी गायों की पहचान के लिए पशु के बालों की जांच करने की प्रणाली विकसित की और उसका पेटेंट लिया! BCM7 पैदा करने वाले दूध के उस अंश को A 1 बीटाकेसीन कहते हैं और उसके पाचन से जो खतरनाक रस निर्माण होता है, उसे BCM7 कहते हैं! यह नशीला होता है; क्योंकि उसमे अफीम ‘मॉर्फीन’ होता है!न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने जब एशिया के गोवंश की जांच की तब वे फूले नहीं समाये! सभी भारतीय गोवंश, जिसमे गीर, साहीवाल, कांकरेज, देवणी, थारपारकर आदि गिनी जाती है, A1 मुक्त यानि सुरक्षित पाए गए |

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क्या आपको नही लगता की इससे अच्छा तो हमारे बच्चों के लिए विष होगा?

आज हम सब लोग सुबह उठते ही चाय की चुस्की लगाते है। हमने पैकेजिंग दूध की सच्चाई अपने दूध के बारे में नहीं सोचा। १ बार अपनी दूध की थैली भी देख लीजिए। आज हम में से ज्यादातर लोग डेयरी का दूध या फिर उसके समकक्ष कोई और दूध पीते होगे। ये दूध खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढाता है जिससे हमारे शरीर में हृदय सम्बंधित बीमारी बढती है।

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अब अमेरिका ने जाना गाय माता के दूध का विज्ञान, लिखी पुस्तक!

गाय एक अद्भुत रसायनशाला है ।

” जननी जनकार ढूध पिलाती , केवल साल छमाही भर ;
” गोमाता पय-सुधा पिलाती , रक्षा करती जीवन भर ” ।

– अमेरिका के कृषि विभाग द्वारा प्रकाशित हुई पुस्तक ” THE COW IS A WONDERFUL LABORATORY ” के अनुसार प्रकृति ने समस्त जीव-जंतुओं और सभी दुग्धधारी जीवों में केवल गाय ही है जिसे ईश्वर ने 180 फुट (2160 इंच ) लम्बी आंत दी है जो की एनी पशुओ में ऐसा नहीं है जिसके कारण गाय जो भी खाती-पीती है वह अंतिम छोर तक जाता है ।

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कही आप अंजाने मे अपने परिवार को विषैला दूध तो नही पिला रहे है?

मथुरा के ‘पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधन संस्थान’ में नेशनल ब्यूरो आफ जैनेटिक रिसोर्सिज़, करनाल (नेशनल क्रांऊसिल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च-भारत सरकार) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. देवेन्द्र सदाना द्वारा एक प्रस्तुति 4 सितम्बर को दी गई।

मथुरा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के सामने दी गई प्रस्तुति में डा. सदाना ने जानकारी दी किः

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चिकित्सा में पंचगव्य क्यों महत्वपूर्ण है?

गाय के दूध, घृत, दधी, गोमूत्र और गोबर के रस को मिलाकर पंचगव्य तैयार होता है। पंचगव्य के प्रत्येक घटक द्रव्य महत्वपूर्ण गुणों से संपन्न हैं।
इनमें गाय के दूध के समान पौष्टिक और संतुलित आहार कोई नहीं है। इसे अमृत माना जाता है। यह विपाक में मधुर, शीतल, वातपित्त शामक, रक्तविकार नाशक और सेवन हेतु सर्वथा उपयुक्त है। गाय का दही भी समान रूप से जीवनीय गुणों से भरपूर है। गाय के दही से बना छाछ पचने में आसान और पित्त का नाश करने वाला होता है।

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