घी

घी खाकर कोलोस्ट्रॉल किया कम, डॉक्टर भी हैरान!

हमारे एक मित्र सुमंत भट्टाचार्य की वॉल से साभार

मेरे एक मित्र हैं विजय शर्मा…
दिल्ली के पॉश इलाके बसंत बिहार में उनकी मिठाइयों की दुकान है बंगाल स्वीट्स नाम से..
उनके पिता की बाय पास सर्जरी हुई थी..
तो मैकाले वाले डाक्टरों ने कहा..
घी और चिकनाई से एकदम दूर रहे..
वरना बैड कॉलस्ट्राल बढ़ जाएगा..
लेकिन उन्होंने देसी गाय का घी इस्तेमाल किया और उनकी रिपोर्ट ..
बता रही है कि बैड कॉलस्ट्राल कम हो रहा है..

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क्या आप जानते है गौमाता के घी का विज्ञान?

गाय का घी(देशी भारतीय नस्ल की गौ माता )

गाय के घी को अमृत कहा गया है। जो जवानी को कायम रखते हुए, बुढ़ापे को दूर रखता है। काली गाय का घी खाने से बूढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा हो जाता है। गाय के घी से बेहतर कोई दूसरी चीज नहीं है।

दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ढीक होता है।

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चिकित्सा में पंचगव्य क्यों महत्वपूर्ण है?

गाय के दूध, घृत, दधी, गोमूत्र और गोबर के रस को मिलाकर पंचगव्य तैयार होता है। पंचगव्य के प्रत्येक घटक द्रव्य महत्वपूर्ण गुणों से संपन्न हैं।
इनमें गाय के दूध के समान पौष्टिक और संतुलित आहार कोई नहीं है। इसे अमृत माना जाता है। यह विपाक में मधुर, शीतल, वातपित्त शामक, रक्तविकार नाशक और सेवन हेतु सर्वथा उपयुक्त है। गाय का दही भी समान रूप से जीवनीय गुणों से भरपूर है। गाय के दही से बना छाछ पचने में आसान और पित्त का नाश करने वाला होता है।

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