हैरान कर देगी आपको गाय माता के दूध पर आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिको की ये रिसर्च!

गाय के दूध को बहुत पौष्टिक होता है । भारत में सदियों से इसके फायदों की बात की जाती रही है । यहां तो नवजात बच्चों को भी गाय का दूध पिलाया जाता था पर अब हमारी सरकारों ने ऐसी व्यवस्था कर दी   है कि अधिकतर लोगों के दिमाग में यह बिठा दिया गया है कि गाय दूध ही नहीं देती या उसकी उपयोगिता ही नहीं है|

***कृपया यह ध्यान रखें कि हम गौमाता यानि देसी गाय की बात कर रहे हैं गाय जैसे दिखने वाले प्राणी जिसे जर्सी कहते हैं उसकी बात नहीं कर रहे हैं उसे तो सूअर के जींस डाल कर मांस के लिए तैयार किया था ।
अतः गाय का मतलब देसी भारतीय गाय / गौमाता।

अब पता चला है कि इसका दूध एचआईवी वायरस से भी निपट सकता है। देसी गाय के दूध पर यह रिसर्च ऑस्ट्रेलिया में की गई है। रिसर्च के नतीजे आने के बाद कहा गया है कि देसी गाय के दूध से एचआईवी वायरस पर असर करने वाली क्रीम या जेल बनाया जा सकता है। देसी गाय के दूध में ऐंटीबॉडी यानी रोग प्रतिरक्षी होते हैं , ये शरीर के इम्यून सिस्टम या प्रतिरक्षी तंत्र को स्वस्थ रखने और उसे मजबूत बनाने का काम करते हैं. जब एचआईवी वायरस शरीर पर हमला करता है तो वह प्रतिरक्षी तंत्र को कमजोर करने लगता है।  देसी गाय के दूध में मौजूद ऐंटीबॉडी इस से लड़ सकते हैं।

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hiv-aids

ऐंटीबॉडी एक तरह का प्रोटीन होता है जो बीमारियों से लड़ने का काम करता है। संक्रमण का खतरा नहीं है मेलबर्न यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों ने गर्भवती गायों पर शोध किया तो यह बात सामने आई। गर्भावस्था के आखिरी महीनों में ही दूध बनने लगता है। इसे फर्स्ट मिल्क या कोलोस्ट्रम कहा जाता है. रिसर्च के लिए इसी का इस्तेमाल किया गया। रिसर्च टीम के अध्यक्ष प्रोफेसर डामियान पर्सल बताते हैं कि कोलोस्ट्रम में भारी मात्रा में एंटीबॉडी मौजूद होते हैं, जो बाद में धीरे धीरे यह मात्रा कम होती रहती है, “यदि जन्म के बाद बछड़े को दूध ना मिले तो उसे बीमार होने का खतरा रहता है। कई बार तो संक्रमण के कारण उसकी जान भी जा सकती है.”

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एचआईवी के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह वायरस कई तरह का होता है. पर्सल बताते हैं, “हर व्यक्ति में एचआईवी के उतने ही अलग प्रकार हो सकते हैं जितने इस पृथ्वी पर इंसान हैं. कम ही लोगों में यह क्षमता होती है कि उनका शरीर वायरस के प्रकार को समझ पाए और उसके खिलाफ ऐंटीबॉडी बना सके। लेकिन देसी गाय ऐसा कर सकती हैं।” यही वजह है कि गाय को एचआईवी संक्रमण का खतरा नहीं होता।

वैज्ञानिक अब चाह रहे हैं कि दवा बनने वाली कंपनी के साथ मिल कर संक्रमण को रोकने के लिए दवा तैयार की जाए। ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने इसके लिए बायोटेक्नॉलॉजी कंपनी इम्यूरोन
से बात भी शुरू कर दी है। इन दवाओं को क्रीम या जैल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बारे में भी चर्चा चल रही है कि महिलाओं के लिए गर्भनिरोधक रिंग में इसका इस्तेमाल किया जाए ताकि एंटीबॉडी लगातार वायरस के खतरा से बचा सकें।

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देसी गाय के दूध से इन दवाओं का बनना इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि इनकी कीमत काफी कम रहेगी। पर्सल की टीम की मारित क्रामस्की बताती हैं, “गाय के दूध के इस्तेमाल से हम बड़ी संख्या में एंटीबॉडी तैयार कर सकते हैं और इस पर खर्च भी बहुत कम आएगा. हम उम्मीद कर रहे हैं कि अंत में हमारे पास एक ऐसा प्रॉडक्ट होगा जिसकी कीमत ज्यादा नहीं होगी।”
दुनिया भर में करीब साढ़े तीन करोड़ लोग एचआईवी से संक्रमित हैं। इस रिसर्च के बाद उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही एचआईवी की रोकथाम के लिए टीका भी तैयार किया जा सकेगा।

साथियों  अब शायद आपको समझ में आ गया होगा कि हमारे पूर्वज क्यों गाय की महिमा गाते हैं और हम मूर्खों की तरह विदेशी दवाओं पर तो विश्वास कर लेते है पर अपनी संस्कृति और अपनी विरासत को सहेजने में शर्म महसूस करते हैं ।

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यदि हर भारतीय सिर्फ देसी गाय का दूध पीना ही शुरू कर दे तो गाय तो बचेगी ही साथ ही आपको आरोग्य फ्री में मिलेगा ।

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