केवल गोबर बेचकर प्रतिवर्ष 6500000 रुपए अर्जित करने वाला कर्नाटक राज्य का हंगव्ठा गांव !

‘कर्नाटक राज्य के बंडीपुर जंगल के निकट स्थित बं हंगव्ठा गांवके किसान काफी उत्पादक कंपनियों को खाद के रूप में गोबर बेचकर प्रतिवर्ष ₹65 अर्जित करते हैं’।

सोलापुर (महाराष्ट्र) की ‘जय संतोषी माता गोशाला’ द्वारा प्रतिवर्ष 300000 उपलों का विदेश में निर्यात !

सोलापुर (महाराष्ट्र) की ‘जय संतोषी माता गोशाला’ गोपालन के साथ प्रतिवर्ष ढाई से तीन लाख उपले निर्यात करती है । यह उपक्रम इस नगर के चार युवा चिकित्सकों ने आरंभ किया है ।

  1. इस उपक्रम से दूध न देने वाली गायों की उपयुक्तता सिद्ध हो रही है ।
  2. पशुवधग्रह में कटने के लिए भेजी जाने वाली गायों को क्रेय कर यह गौशाला आरंभ की है । इस कार्य का उद्देश्य ‘देसी गोधन को बचाना’ है ।
  3. इस गोशाला में 7 वर्ष पहले 7 गायें थीं । आज वहां 85 गायें हैं ।
  4. एक गाय पर प्रतिदिन साठ रुपए होते हैं ; परंतु केवल 25 उपलों की थैली 35 रूपय में बिकती है ।
  5. यहां की तीन महिलाएं प्रतिदिन एक सहस्त्र 500 के लिए बनाती है ।इससे उन्हें पांच से छह शास्त्र रुपए का मासिक वेतन मिलता है ।
  6. अग्निहोत्र के लिए इन उपलों की अधिक मांग है । रूस, जर्मनी, मलेशिया आदि देशों में ये उपले भेजे जाते हैं ।
  7. इस गौशाला में औषधी निर्माण और जैविक खाद के लिए उपयोगी ‘जीवामृत’ भी बनाया जाता है ।

केवल देसी गायों की पूंजी पर 20 एकड़ नया खेत क्रय करने वाला कृषि स्नातक !

‘महाराष्ट्र के सातारा जनपद में एक गांव है, ‘बिदाल’ । यहां के निवासी अशोक इंगावले कृषि विषय में स्नातक है । इन्होंने वर्ष 1997 के पश्चात केवल देसी गायों के निवेश पर 20 एकड़ नया खेत क्रय किया है । इससे प्राप्त पूंजी को उन्होंने पुनः गाय और खेत में लगाकर बड़ा व्यवसाय खड़ा किया है । इस गांव में उनकी अपनी गौशाला है जिसमें 100 गाय है । शीघ्र ही वह कृषि के साथ दूध और दूग्ध पदार्थों का अपने ब्रांड का व्यवसाय आरंभ करने का उनका मानस है । वे कहते हैं कि एक गाय एक एकड़ भूमि पालती है और न्यूनतम डेढ – दो लाख की आय अवश्य कराती है ।

ब्राजील भारतीय गाय का महत्व समझ चुका है। इसके साथ ही अनेक विकसित देश भारतीय गाय के संवर्धन हेतु प्रयतनशील है । (भारतीयों को जिस दिन देसी गाय का महत्व समझ आएगा, वह सौभाग्य का दिन होगा ! – संकलकर्ता )

देसी गायों पर आधारित अर्थव्यवस्था वाला महाराष्ट्र का आदर्श गांव, ‘रामणवाडी’ (जनपद कोल्हापुर )!

  1. देसी गाय का महत्व समझने पर रामणवाडी गांव के ग्रामीणों ने किया 80 देसी गायों का पालन ! : रामणवाडी (तहसील राधानगरी, जनपद कोल्हापुर, महाराष्ट्र) गांव के ग्रामीण 70 से 80 देसी गायों को पालन करते हैं ।उस गांव में गोमूत्र की डेयरी आरंभ की है । यह डेयरी ₹8 प्रति लीटर की दर से गोमुत्र क्रय करती है। यहां प्रतिदिन दूध की भांति किटली में गोमूत्र इकट्ठा किया जाता है ।
  2. गांव का गोमूत्र ‘गोमूत्र डेयरी’ में जमा कर बेचना : यहां के ग्रामीण सवेरे अपनी-अपनी गाय का पहली धार का मूरत्र इकट्ठा कर, एक घर में स्थित इस डेयरी में पहुंचाते हैं । एक गाय प्रतिदिन इस मुत्र से 11-12 रूपए दिलाती है । आयुर्वेदिय साबुन और अन्य बनाने के लिए यह गोमुत्र कोल्हापुर से हरिद्वार भेजा जाता है । यहां के ‘वेणुमाधुरी’ ट्रस्ट ने गाय के संवर्धन हेतु यह आरंभ किया है ।
  3. आजकल यहां का 1 लीटर गोमूत्र अर्क ₹125 में 200 मिलीलीटर गोमुत्र 35 रुपए में और पूजा के लिए छोटी बोतलों में ₹10 में बिकता है । कृषि में कीड़े मारने के लिए गोमूत्र की मांग बढ़ी है ।
  4. बेलों का उपयोग कर तेल कोल्हू आरंभ करना : गायों से जन्मे बछडो का पालन कर उनकी शक्ति से चलने वाले तेल के कोल्हू वहां के गांव वालों ने आरंभ किया है । यंत्र से निकाले गए तेल के घटक तथा कोल्हू में बेल द्वारा निकाले गए तेल के घटकों में अंतर है । इसलिए कोल्हू के तेल की मांग अधिक है ।

गाय के गोबर से बने उपलों की अच्छी मांग : देसी गाय का सुखा हुआ गोबर रानगोवरी (वन्य कंडे) के नाम से 6 रूपए किलो की दर से क्रय किया जाता है । इसका उपयोग अनेक धार्मिक कृत्यों में तथा कीटाणुनाशक धुएं के लिए, दो रुपए में इस कंडे का एक छोटा टुकड़ा बेचा जाता है । गाय के कंडे के एक छोटे से टुकड़े पर एक चम्मच गाय का घी तथा चावल के कुछ दाने डालकर जलाने से जो धुआं निकलता है, उससे अनेक प्रकार के हानिकारक कीटाणु नष्ट होते हैं । गाय से दूध मिलना घट जाने पर उसके मूत्र और गोबर से बहुमूल्य खाद तथा मिथेन वायू (गैस) बनाने का यंत्र भी बनाया गया है । देसी गाय का गोबर विष- शोषक है । गोबर से हानिकारक आणविक किरणोत्सर्ग से हमारी रक्षा होती है ।

गाय के कारण विविध रोगों पर उपचार संभव : देसी गाय के मूत्र से कर्करोग (कैंसर) ठीक होता है। रक्तचाप का रोगी देशी गाय की पीठ पर ककुद् (ऊंचा भाग) से पूंछ तक प्रतिदिन 5 मिनट हाथ फेरे, तो इससे रक्तचाप की समस्या दूर होती है ।