विदेशो मे क्यो बढ़ रही है देशी गौमाता की माँग?

जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि के मद्देनजर देसी नस्ल की भारतीय गायों पर अनुसंधान की दुनिया के प्रमुख देशों की बढ़ती अभिरुचि को देखते हुए सरकार ने भी देसी नस्ल के संरक्षण और संवर्धन का कार्य तेज कर दिया है। भारतीय देसी गायों में अधिक तापमान बर्दाश्त करने की अद्भुत क्षमता, कीट तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं पौष्टिक तत्वों की कम जरूरत और रख रखाव में आसान होने के कारण दुनिया के प्रमुख राष्ट्र इसका आयात कर रहे हैं। इन देशों में अमेरिका, आस्ट्रेलिया और ब्राजील भी शामिल हैं। ये देश इन गायों का उपयोग अनुसंधान तथा उन्नत नस्ल विकसित करने के लिए कर रहे हैं। विदेशियों की रुचि शारीवाल, राठी, थारपाकड, गिर और कांकरेज नस्ल की गायों में हैं। शाहीवाल नस्ल की गायें पंजाब, राठी और थारपाकड़ राजस्थान में तथा गिर और कांकरेज नस्ल की गायें गुजरात में पाई जाती हैं।

maangऐसा माना जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन और तापमान में वृद्धि के कारण 2020 तक देश में 32 लाख टन दूध का उत्पादन कम हो जाएगा जो दूध के अभी के मूल्य से 5000 करोड़ रपए से अधिक का होगा। वर्ष 2007 की गणना के अनुसार देश में लगभग नौ करोड़ देसी नस्ल की गायें थीं। इससे पूर्व 1997 की तुलना में 2003 में देसी गायों की संख्या घट गई थी। देश में 37 किस्म की देसी नस्लों की गायों की पहचान की गई है। केंद्र सरकार ने देसी गायों के संरक्षण और संवर्धन तथा महानगरों में आवारा पशुओं पर नियंतण्रके लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत की है। बारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान देसी गायों को बढ़ावा देने पर 500 करोड़ रपए खर्च किए जाएंगे। वर्ष 2014-15 के दौरान इस योजना पर 150 करोड़ रपए खर्च किए जाएंगे। इस योजना को राज्य सरकारों की एजेंसियों, गोशाला बोर्ड, स्वयंसेवी संगठनों आदि के माध्यम से लागू किया जाएगा। इस योजना एक उद्देश्य परियोजना क्षेत्र में देसी गायों का दूध उत्पादन एक हजार लीटर तक बढ़ाना तथा अच्छी नस्ल के गायों के लिए बेहतरीन किस्म के सांढ़ों को तैयार करना भी है ताकि इसका वितरण गांवों में किया जा सके।

गोकुल ग्राम योजना के तहत बड़े शहरों के आसपास लगभग एक हजार गायों को एक साथ रखा जा सकेगा। इनमें 60 प्रतिशत देसी दुधरू गायों तथा 40 प्रतिशत बिना दूध देने वाली गायें होंगी। इन गायों का पालन पोषण वैज्ञानिक ढंग से किया जाएगा तथा समय-समय पर इनके स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। गोकुल ग्राम प्रबंधन की गोपालन को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यहां जो दूध का उत्पादन होगा, उसकी सही तरह से जांच की जाएगी तथा वैज्ञानिक ढंग से उसका भंडारण किया जाएगा। फिर इसकी बिक्री की जाएगी। गाय के गोबर से जैविक उत्पाद तैयार किया जाएगा। गोकुल ग्राम में बायो संयंत्र भी स्थापित किया जाएगा जिसमें यहां बिजली की सुविधा मिलेगी। (वार्ता) वर्ष 2007 की गणना के अनुसार देश में लगभग नौ करोड़ देसी नस्ल की गायें थीं देश में 37 किस्म की देसी नस्लों की गायों की पहचान की गई है केंद्र ने देसी गायों के सं रक्षण और संवर्धन के लिए भी राष्ट्रीय गोकुल मिशन शुरू किया !

भारत की इन गायों में बढ़ी रुचि शाहीवाल (पंजाब) राठी (राजस्थान) थारपाकड़ (राजस्थान) गिर (गुजरात) कांकरेज (गुजरात) अधिक तापमान बर्दाश्त करने की अद्भु त क्षमता कीट तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता पौष्टिक तत्वों की कम जरूरत, रख रखाव में आसान !

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